शादी के बाद का प्यार
शादी की पहली रात
वह कमरा गुलाब की पंखुड़ियों से सजा हुआ था। मेरी नई दुल्हन, प्रिया, बिस्तर के किनारे बैठी थी, उसकी लाल साड़ी उसके नाजुक बदन पर ऐसे लिपटी हुई थी जैसे कोई चित्रकार अपनी सबसे सुंदर कृति को सजा रहा हो।
मैं धीरे से उसके पास बैठा और उसका घूँघट उठाया। उसकी आँखें नीची थीं, लेकिन मैंने देखा कि वह मुस्कुरा रही थी। "क्या तुम डर रही हो?" मैंने पूछा, उसके चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए।
"नहीं," उसने कहा, अब मेरी आँखों में देखते हुए। "बस... इंतज़ार कर रही हूँ।"
पहला स्पर्श
मैंने धीरे से उसकी चोटी को छुआ, उसके बालों की खुशबू ने मुझे नशे सा चढ़ा दिया। मेरी उंगलियाँ उसके गालों पर फिरीं, फिर उसके होंठों तक पहुँचीं। उसने मेरी उंगलियों को अपने होंठों से छुआ, और मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई।
"तुम्हारे हाथ बहुत गर्म हैं," उसने फुसफुसाया, मेरे हाथ को अपने हाथों में लेते हुए।
अनजान रास्ते
मैंने धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू हटाया, उसके कंधों को उजागर करते हुए। उसकी त्वचा चाँदनी की तरह चमक रही थी। मैंने अपने होंठों से उसके कंधे को छुआ, और वह एक झटके के साथ सिहर उठी।
"डरो मत," मैंने कहा, जैसे उसके विचारों को पढ़ लिया हो। "हमारी यह रात सच्चाई से ज्यादा खूबसूरत है।"
पहला चुंबन
जब मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, उसके होंठ मेरे होंठों से मिल गए। वह चुंबन मधुर था, धीमा था, और ऐसा लगा जैसे समय थम सा गया हो। उसके हाथ मेरे बालों में फंस गए, और मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में भर लिया।
"हमें धीरे करना चाहिए," उसने कहा, लेकिन उसके हाथ मेरी शर्ट के बटन खोल रहे थे। "यह हमारी पहली रात है..."