रात की गर्म सुर्खियाँ
प्रथम भेंट
उस गर्मी की शाम को जब मैं कैफे में बैठा था, वह अचानक मेरी मेज के सामने आकर खड़ी हो गई। उसकी सुगंध ने मेरे होश उड़ा दिए - वह खुशबू जो मैं कभी नहीं भूल पाया। "क्या यह सीट खाली है?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ में एक मधुर कंपन था जो सीधा मेरे दिल तक पहुँच गया।
मैं केवल सिर हिला सका, अपनी आँखें उसके होंठों से हटा नहीं पा रहा था - गुलाबी, नम, और एक अजीब सी मुस्कान से सजे हुए। वह बैठ गई, और उसके हाथ ने गलती से मेरे हाथ को छू लिया। उस स्पर्श ने मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ा दी।
"मैं आदित्य हूँ," मैंने कहा, अपनी आवाज़ को स्थिर रखने की कोशिश करते हुए।
"मैं जानती हूँ," उसने जवाब दिया, उसकी आँखों में एक चमक के साथ जिसने मुझे और भी अधिक उत्सुक बना दिया। "मैं तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जानती हूँ।"
अनजान यात्रा
वह शाम कैफे से शुरू हुई एक यात्रा का पहला पड़ाव थी। रिया - उसका नाम था - ने मुझे शहर के उन कोनों में ले जाने का वादा किया जिन्हें मैंने कभी नहीं देखा था। और वह सचमुच ऐसा ही कर रही थी, लेकिन न केवल शहर के, बल्कि मेरे अपने ही शरीर के अनजान कोनों की यात्रा पर।
हम एक छोटे से जैज़ क्लब में समाप्त हुए, जहाँ नीली रोशनी ने उसकी त्वचा को एक अलौकिक चमक दी। जब वह नृत्य करने लगी, तो उसके हर मूवमेंट ने मेरे भीतर एक आग जला दी। वह मेरे पास आई, उसके होंठ मेरे कान के पास आए, और उसने फुसफुसाया, "क्या तुम मुझे अपने साथ घर ले जाना चाहोगे?"
मेरा दिल धड़कना बंद करने वाला था। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, और हम टैक्सी में सवार हो गए, हमारी उंगलियाँ एक दूसरे में उलझी हुईं, हमारी साँसें तेज हो चुकी थीं।
जुनून की रात
उसके अपार्टमेंट का दरवाज़ा बंद होते ही, वह मेरे ऊपर आ गई, उसके होंठ मेरे होंठों से जुड़ गए। उसका चुंबन आक्रामक था, भूखा, और मैं उसकी इस जरूरत में खो गया। उसके हाथों ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए, उसकी उंगलियों ने मेरी छाती को छुआ, और मैं एक झटके के साथ सिहर उठा।
मैंने उसे वापस खींच लिया, उसकी पीठ दीवार से टकराई। मेरे हाथ उसकी पतली ड्रेस के नीचे गए, उसकी नर्म त्वचा को महसूस करते हुए। वह मेरे कान में कराही, "मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे पूरी तरह से अपना बना लो।"
हम बिस्तर पर गिरे, कपड़े उड़ते हुए, शरीर एक दूसरे से चिपके हुए। उसकी गर्मी, उसकी सुगंध, उसकी हर आवाज़ ने मुझे पागल कर दिया। जब हम अंततः एक हो गए, तो यह एक विस्फोट की तरह था - तीव्र, उग्र, और पूरी तरह से अविस्मरणीय।
भोर की मधुरता
सुबह की पहली किरणों ने हमें नग्न, एक दूसरे में उलझे हुए पाया। रिया ने अपनी उंगलियों से मेरे सीने पर खेलना शुरू किया, एक मुस्कान उसके होंठों पर थी। "तुम्हारी आँखें सुबह में और भी सुंदर लगती हैं," उसने कहा, अपने होंठों को मेरे होठों के पास लाते हुए।
हमारा दूसरा दौर धीमा और अधिक सुखदायक था, हर स्पर्श, हर चुंबन में एक नई गहराई के साथ। जब मैंने उसे अपने नीचे महसूस किया, उसकी आँखें मेरी आँखों में ताक रही थीं, मुझे एहसास हुआ कि यह केवल शारीरिक नहीं था - कुछ और, कुछ गहरा जन्म ले रहा था।
जैसे-जैसे दिन चढ़ा, हमारे शरीर अलग हुए, लेकिन हमारी आत्माएँ उस रात के जादू में बंधी रहीं। और जब मैं उसके दरवाज़े से बाहर निकला, तो मैं जानता था कि यह अंत नहीं था - बल्कि एक नई शुरुआत की पहली सुर्खियाँ थीं।
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