रात की गर्म सुर्खियाँ
मुलाकात
वह दिवाली की रात थी जब पहली बार मैंने उसे देखा। उसकी लाल साड़ी में वह चमक रही थी जैसे कोई देवी। पटाखों की रोशनी में उसका चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे चाँदनी रात में खिला गुलाब।
जब हमारी नजरें मिलीं, उसने शरमा कर नीचे देख लिया। लेकिन उसकी आँखों में मैंने एक ऐसी चिंगारी देखी जो मेरे दिल को जला गई। "तुम यहाँ नए लगते हो," उसने कहा, उसकी मधुर आवाज़ ने मेरे कानों में शहद घोल दिया।
पहला स्पर्श
जब उसने मुझे मिठाई खिलाई, उसकी उंगलियाँ मेरे होंठों से छू गईं। उस स्पर्श ने मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ा दी। मैंने देखा कि उसकी कलाई पर मेहँदी के डिजाइन थे, और मैं सोचने लगा कि काश यह मेहँदी मेरे नाम की होती।
"तुम्हारा हाथ कितना गर्म है," उसने फुसफुसाया जब मैंने उसका हाथ पकड़ा। उसकी सांसों में गुलाब की खुशबू थी जो मुझे नशे सा चढ़ रही थी।
अनजान रास्ते
वह मुझे उस छत पर ले गई जहाँ से पूरा शहर दिख रहा था। पटाखों की रोशनी में उसका चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे कोई सपना। जब उसने अपनी चुनरी ठीक की, मैंने देखा कि उसकी पीठ का कुछ हिस्सा खुला हुआ था। मेरी उंगलियाँ उस नर्म त्वचा को छूने के लिए बेचैन हो उठीं।
"डरो मत," उसने कहा, जैसे मेरे विचारों को पढ़ लिया हो। "आज की रात सच्चाई से ज्यादा खूबसूरत है।"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें